It’s Me…

Sometimes I want to write a blog in English but due to my poor English or you can say inability to find the proper words, I rarely dare to do that. But this time I am writing my blog in English no matter what the language is, what the words are chosen by me. This …

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It’s you vs you

है मुक़ाबला तेरा खुद से, चल ले आज इतना कि ना जीत पायें शुभम कल का कभी।

मंजिल

आज आशिकों की भीड़ में यह पहचानना मुश्किल है कि कौन मंजिल का आशिक़ है और किसकी मंजिल आशिकी है।

है मेरा वो एक दोस्त…

मेरे ग़म में ही गमगीन मेरी ख़ुशी उसकी मुस्कान है मेरा वो एक दोस्त आईने के उस पार उसका नाम भी "शुभम" ही है।

भीड़

हम अकेले तुम अकेले हम सब अकेले और भीड़ हो गई।

हम दोनों अकेले…

आज रेहान को गुजरे पूरा एक साल हो गया है... न जाने कितनी ही दफ़ा हम दोनों यहाँ साथ आये थे, न जाने कितने ही प्याले हमने साथ गटकें थे। एक दूसरे के साथ ख़ुशी और ग़म बाँटा करते थे। और फिर...  वो हादसा... आज भी मैं उसके पसंदीदा बार में उसी टेबल पर बैठा …

अधूरी मुस्कान

रेडियो पर सर्व शिक्षा अभियान की घोषणा सुनकर उसके चेहरे पर मुस्कान खिल गई, पढ़ाई-लिखाई, पुस्तकें, स्कूल और ना जाने क्या क्या खयाली पुलाव पकने लगे। “आशा, कपडे धुल गए क्या .. जल्दी कर .. अभी बर्तन भी मांजने है।” वो भी जान चुकी थी कि किताबों से पेट नहीं भर सकता।

हम बहनें

"कुछ खाओगी?" अपना हाथ बढ़ाते हुए मैंने अपनी बहन से पूछा। दरअसल वो मेरी बहन नहीं थी या ये कहना ज्यादा ठीक रहेगा कि इस विशाल समन्दर रूपी जगत में हम दोनों का हमारे सिवा कोई नहीं था। बेटी होने का दुःख उसने भी भोगा था, वो भी अपने पिता की सीमाहीन शक्ति का परिचय …

थैंक गॉड

अख़बार पढ़ते ही वे सदमे में आ गए, खबर थी- "कल रात कार एक्सीडेंट में एक सत्रह साल के युवक की जान चली गयी, चेहरा बुरी तरह जख्मी है। लाश की पहचान की जा रही है।" और उनका इकलौता बेटा तीन दिनों से लापता था। सारे घर में शोक व्याप्त हो गया, वे दौड़े-दौड़े पुलिस …

जिंदगी की राह में

जिंदगी जीता रहा कभी हार हुई कभी जीत हुई मक़ाम की तलाश में चलता रहा कभी रुक गया। ठोकर मिली घास भी हुआ खुश उदास भी अकेला ही चला था मैं, साथ मिला नहीं किसी का विचारों के संग्राम में उम्मीद भी नही किया। कारवाँ बनता गया अर्थ कुछ और था मंजिल बदलती गई मक़ाम …