एक अनुत्तरित प्रश्न

क्या तुम वही हो,

जो हर वक़्त दीखते हो?

क्या तब भी 

जबकि हवा का बहाव बहुत तेज होता है?

और तब भी, 

जबकि तुम्हें रोका जाता है,

धारा के विपरीत तैरने से।

मंझधार में फंसे होकर भी,

जब तुम निर्णय लेने की अक्लमंदी दिखाते हो;

क्या तब भी तुम वही होते हो,

जो होने का दावा करते फिरते हो तुम?

और 

जब तुम मौत को करीब पाते हो,

बिल्कुल उतने ही पास

जितनी जिंदगी की निकटता है तुमसे,

क्या तब भी तुम महसूस करते हो 

कि तुम्हारी साँसे हवाओं से भी मन्द है।

तुम परिस्थितियों से हो,

या परिस्थितियाँ तुमसे?

आखिर कौन हो तुम?

क्या तुम वही हो

जिसने अभी-अभी आत्मावलोकन किया है?​

घटनाक्रम

पत्ते यूँ ही नहीं गिरते,

पानी यूँ ही नहीं बहता,

यूँ ही ऋतुएँ भी नहीं बदलती,

सब कुछ इसलिये भी नहीं घटता

कि यही नीति है।

कुछ घटनायें घटती है संयोग से,

संयोग भी यूँ ही नहीं बनता।
कुछ भी नहीं होता

सिर्फ होने के लिए

हम वजह ढूंढ लेते है अक्सर

उन तमाम घटित घटनाओं के लिए

जो प्रेरणा होती है भविष्य की।

मजबूरी

दिलसार मियां अपनी मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान में कुछ परेशान से बैठे थे, बढ़ती प्रतिद्वंद्विता ने उनकी आमदनी कम कर दी थी। उधर अब्बाजान की डायबिटीज की बिमारी, उनका ईलाज, घर का खर्च दिलसार मियां पर भारी पड़ रहे थे। 

तभी उनकी टेबल पर आवाज हुई, सामने पड़ोस के चौहान बाबू खड़े थे।

“मियां, जरा ये मोबाइल देखना क्या हो गया है।”

दिलसार ने झटपट मोबाइल की परेशानी खोज ली…“अरे ये तो बड़ी चपत हो गई हैंगिंग का प्रॉब्लम है, शायद वायरस आ गया है, हज़ार रुपये लगेंगे।”

मजबूरी दिलसार मियाँ को भी बेईमानी सीखा गई।

Nil battey sannata…

Unlike movie review, It’s my personal thoughts on 100 minutes of Nil battey sannata.


According to Wikipedia it’s an indian comedy drama, but in every aspect it is more than a comedy drama. The movie is full of emotions, forces us to think.

Since I’m not a movie critic ( The world already has plenty of critics, lol). I can’t tell you about the acting part of the movie, anyway Swara bhaskar and Ria shukla did good job, Ratna pathak and Pankaj tripathi played an important supporting role, despite less screen of Pankaj tripathi you’ll be obsessed of him because of his acting.

Some Beautiful dialogues and conversations:

  • “इंसान दो चीज़ों से बनता है या तो किस्मत या मेहनत।”…..“और गरीब क़े पास किस्मत होती तो वो गरीब थोड़े ही होता।”…..“तो बची मेहनत वही करनी पड़ेगी।”
  • “लल्ली तेरे बाल देख कर नहीं लगता कि तू कल की सोचता है।”
  • “अगर मैंने ही हार मान ली न साजिया तो फिर तो अप्पू कभी भी जीतने से रही।”

Dialogues forces us to think:

  • “जब हाथ में कलम लेने का मौका मिल रहा है न, तो जबरदस्ती ये बेलन करछी मत उठा।”
  • “खुद तो अपनी जिंदगी में कुछ कर नहीं पायी, और अब अपने सपने मुझपे थोप रही है।”
  • “वो तुम पर अपने सपने नहीं थोप रही, उसका तो सपना ही तुम हो अप्पू।”
  • “इस देश में तो बच्चों को अपना करियर डिसाइड करने का कोई फ्रीडम ही नहीं है।”
  • “माँ हूँ मैं तेरी, गुड़िया”…..“तो बाप बनने की कोशिश मत कर”

And for the last motivational conversation of Swara bhaskar and Ria shukla you should watch “Nil battey Sannata”.

स्कूटर

“मैं कुछ नहीं जानता, मुझे बस मोटरसाइकिल चाहिए, मेरे कॉलेज के सभी दोस्तों के पास मोटरसाइकिल है।” रमेश तमतमाता हुआ घर से निकल गया।

“अब इतने पैसों का इंतजाम कहाँ से करेंगे आप, आपकों कम से कम उसे समझाना तो था।”

“नहीं शुशीला, अब थोड़ी सख्ती उसे हमसे दुर ले जायेगी, और मैं नहीं चाहता की विक्रम की तरह रमेश भी…।” अपने स्कूटर पर सवार होकर मास्टरजी भी निकल गए।

कॉलेज से लौटते वक़्त…

“यार शिवम चल ना बाइक देखते है।”

“पैसे कहाँ से लाएगा?”

“चल तो”

“भैया सेकंड हैण्ड बाइक है?”

“हाँ वो पीछे पल्सर रखी है चालीस हज़ार लगा देंगे और वो बगल का स्कूटर पन्द्रह हज़ार में।”

“रमेश, ऐसा ही स्कूटर तो अंकल के पास भी है ना!”
रमेश खामोश था।​

Fear vs Curiosity…

It was not completely dark night, Despite four fingers of four members sitting around a board there were four candles, a little hope, a hope of experiencing some supernatural power.

It was an “Ouija board experiment”. most of people already know but for the rest one:- The ouija board is a spirit board marked with the letters of the alphabet, numbers 0–9, words “yes”, “no” etc.
Participants place their fingers on the planchette (It can be a coin), and it moves about the board to spell out words.

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It was not just like an ordinary chemistry or physics experiment, for us it was an experiment of “fear and curiosity.”
It was not an ordinary night like other nights we were not going to grab some mangoes, instead of that we were going to grab some supernatural experience.
There were some students they did it atleast once and we had no experience of it, we gather some information from themselves, how to ensure spirit is here and how to ask questions without letting her angry. It was a complete plan, we got complete information and every myth about Ouija board.
And we were fully prepared for every consequences.

After 30 minutes of unexpected silence we got a movement in coin, but we were not sure “Is it a prank by one of our group member or The spirit has arrived.”
And I asked “Are you here?”
And the coin rapidly moved to “yes.” Then another one asked ” What is your name?”
And coin started to move from it’s initial position to K…then A… then P… then I… and one of us guessed and said clearly ” Kapil?”
And then coin moved toward “yes.”
It was quite shocking for us because one of our group member was kapil. And recently we read a news of accident on railway track and that railway track was hardly 200 meters from our location. and the victim of accident was “Kapil”…

Before experiment one of my friend told me about confirmation of real and fake spirits, and the trick was ask someone’s birthday or anything related to someone.
And we started to fire some questions like birthday, crush etc.
And we were amazed, because every move of the coin was in right direction.
And it was the first success of “Ouija board experiment”

After the success of first Ouija board experiment I tried it many times and I got some facts that were unexpected.
When I performed it again I got that if any of us don’t know something then the coin is unable to answer. And when I started to think about something no matter was that an answer of that question or anything nonsense, coin started to slide through the exact alphanumerics.
Then I tried to instruct every mind by providing a rough idea of what I am thinking, And it was like I put my finger on coin for half distance and let them cover half distance.
And by this, they got some clue about what I was thinking.

And after repeating this experiment again and again.
I conclude so many things but in this post I am sharing my experiment only, because after whole experiment, some members started to believe and other refused the existence of supernatural powers.

please let me know what you think about supernatural powers.
now it’s your turn to comment.

क़िस्मत

अभी कुछ ही देर पहले ये हुआ, और पता नहीं कैसे और क्यों मैं इसे लिखने पे मजबूर हो गया।

घर जाते वक़्त केले लेने की मेरी ये रोज की आदत है, और हर दिन की तरह आज भी मैं उनसे 50 रुपये में 24 केलों की मांग कर रहा था, जाहिर था कि वो मना ही करेंगे और उन्होंने मुझे आज भी निराश नहीं किया हर रोज की तरह, पर इस सौदेबाज़ी के अलावा आज कुछ अलग हुआ, कुछ ऐसा जो मैं किसी केले के ठेले पर ही महसूस कर सकता था और शायद कहीं नहीं।
तो हुआ यूँ कि केले वाले बाबा ने पास से गुजर रही एक महिला को आवाज लगाई-
“अपेक्षा डॉक्टर को दिखा दिया।” एक परिचित महिला का हाल पूछकर उन्होंने अपना फर्ज निभाया।
“हां बाबा, डॉक्टर के पास से ही आ रही हूँ।”
“अच्छे डॉक्टर को दिखाना, ये अंसारी- वंसारी सब ऐसे ही है।”
अब ये उनकी टिप्पणी करने की आदत थी या उनका अपना अनुभव ये समझना मेरे लिए उस वक़्त तो नामुमकिन ही था।
“हां, बड़े मेडिकल से आ रही हूँ।”
“इत्ते दूर! ”
करीब 15 किलोमीटर दूर की जगह का नाम सुनकर उनकी ये प्रतिक्रिया स्वाभाविक ही थी।
“हज़ार रुपये का खर्चा आ गया बाबा, अभी कल और जाना है। जितना तो कमाई नहीं उतना खर्चा आ गया।”
“अब क्या कर सकते है, “किस्मत” में लिखा है तो पैसा जाएगा ही किसी न किसी तरह।”

वो किस्मत को कोसकर आगे बढ़ गए, और मैं वही थम गया… “आखिर सच कहा उन्होंने या सांत्वना दी?”

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